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Thursday, 8 November 2018

Life will not Happen Again - जिंदगी न मिलेगी दोबारा

Life will not Happen Again - जिंदगी न मिलेगी दोबारा




Seventy-year-old was a logger. Carrying wooden sticks - were carrying past life. Often wondered why that should not die. Often prayed to God, "Lord, why not send my death. What Essence In this life. Rose logging, raise and sell them, tired. June then get very. Never - ever falls in the fasting day. Old also M. Who ever gets sick. It is also a life. One day he was returning to cough Khankharta your bundles all of the sudden she felt vain live May all why I am carrying. He slammed down bundle, said with folded hands to the sky, to the death, and I not only do you get everyone. O Death.They what I forgot, Take now.

Incidentally, it has little. Death.They there were passing through. Anyone going to Qatar, were thought to be large hearted cry, I must go. He put his hand on the shoulder and said Death.They woodcutter brother, what is the job ?

Woodcutter saw death standing in front. Soul shook. Death had called many times in life - is to call a fun Come unless was now facing death shook the soul. Things die forgotten, Woodcutter said, "nothing. What happened is that I've fallen down a bundle of wood. Not going to show up here, So you called. Just give lift. And greet, there is no need to come. So I am saying that a life. But I do not die. I just picked up my bundle and lay my head on.

Sawyer was tormented by the bundles, The head rested on the Death. They Utwakr the thrill of seeing that day was being keepers. When he came to the house had already become young. That was very happy to have escaped death survival and increases the moment of death. Once the purpose of life and life after death, when faced with life itself automatically becomes conspicuous Vjhe.

  
जिंदगी न मिलेगी दोबारा





एक लकड़हारा सत्तर साल का था | लकड़िया ढोते – ढोते जिन्दगी बीती जा रही थी कई बार सोचा की मर क्यों न जाऊं ! कई बार परमात्मा से प्राथना की,’हे प्रभु , मेरी मौत क्यों नही भेज देता | सार क्या है इस जीवन में ! रोज लकड़ी काटना, उन्हें उठाना और बेचना, थक गया हूँ | इतनी मेहनत के बाद भी मिलता क्या है ? एक जून मिल जाए तो बहुत | कभी - कभी दिन उपवास में पड़ता है | बुढा भी हो गया हूँ | कभी बीमार होजाता हु | ये भी कोई जिन्दगी है | ‘एक दिन वह लौट रहा था खांसता खंखारता अपने गट्ठर को लिए अचानक उसे लगा की बिल्कुल व्यर्थ है जीना , मई सब ये क्यों ढो रहा हु | उसने गट्ठर निचे पटक दिया, आकाश की तरफ हाथ जोड़कर कहा की मृत्यु, तू सबको आती है और मुझे ही नही आती | हे यमदूत मुझे क्या भूल गये हो, उठा लो अब |
संयोग ही है ऐसा बहुत कम होता है | यमदूत वहाँ से गुजर रहे थे | किसी को लेने जा रहे थे- सोचा कि बड़े ह्रदय से क़तर होकर पुकार रहा है , मुझे जाना ही चाहिए | यमदूत ने लकड़हारे के कंधे पर हाथ रखा और बोले क्या भाई, क्या काम है ?
लकडहारे ने देखा की मौत सामने कड़ी है |प्राण कांप गये | कई दफे जिन्दगी में बुलाई थी मौत – बुलाने का एक मजा है, जब तक न आये |अब मौत सामने खड़ी थी तो प्राण कांप गये | भूल ही गया मरने वाली बाते | लकड़हारे ने कहा ,’कुछ नही | हुआ ये की मेरा एक लकड़ी का गट्ठर निचे गिर गया है | यहाँ कोई उठाने वाला नही दिखा, इसलिए आपको बुलाया है | जरा उठा दे | और नमस्कार, कोई आने की जरुरत नही है | ऐसे तो मै जिन्दगीभर कहता रहा हूँ, लेकिन मुझे मरना नही है | बस मेरा यह गट्ठर मेरा उठाकर मेरे सिर पर रख दे |
लकड़हारा जिस गट्ठर से परेशान था, उसी को यमदूत से उठवाकर सिर पर रख लिया उस दिन रखवाले की पुलक देखते ही बन रही थी | जब वह घर की तरफ आया तो पहले से जवान बन चुका था | बड़ा प्रसन्न था की बच गए मौत से मौत के क्षण जिजीविषा और तेज हो जाती है | एक बार मौत से सामना होने के बाद जिन्दगी का मकसद और जिन्दगी जीने का वजहे खुद–ब-खुद दिखने लगती है |  

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